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फासले

सूरज की गर्मी और बादल की नरमी एक कली को फूल बना देती है दुनिया के फासले और दिल की मोहब्बत हर रिश्ते को मुक़म्मल बना देते है मेहनत और मशक्क़त के ज़ख्म कामयाबी के मरहम से भर जाते है ज़िन्दगी का हर एक लम्हा ज़िन्दगी का एहसास दिलाता है ग़म से मायूस न हो मुस्तन ग़म ही ख़ुशी का ज़रिया बन जाता है

उम्मीद

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हर वक़्त निगाहें टिकी रहती है आसमान पर काश वोह आसमान मेरे पिंजरे में आ जाए हर वक़्त खोया रहता हूँ वोह बचपन की यादों में काश वोह खुशहाल  बचपन वापस मेरी ज़िन्दगीमें आ जाए हर वक़्त सर रखता हूँ मरहूम तेरी कबर पर काश तेरे बेजान जिस्म में वापस जान आ जाए क्यूँ नहीं? आखिर सूरज और चाँद ने भी तो मनमानी की है! उसने भी तो आसमान से अपनी दीवार और छत बनाई है! क्यूँ नहीं? बारिश की वोह बूँद ने भी तो सूरज की किरण को चूमकर बादलको गले लगाया है! क्यूँ नहीं? सूरज भी तो सारी रात रूठकर सुबह मुस्कुराता हुआ वापस आता है? क्यूँ नहीं? केहते है मांगो तो खुदा भी मिल जाता है तो फिर मरहूम की जान कौनसी बड़ी बात है? - Musten Jiruwala

प्रतिबिंब

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किसीके सामने बड़ा, तो किसीके सामने छोटा किसीके सामने दुबला, तो किसीके सामने मोटा किसीके सामने लम्बा, तो किसीके सामने नाटा किसीके सामने अच्छा, तो किसीके सामने बुरा तरस गया हूँ में अपनी असली सूरत के लिए ढूंढ रहा हूँ वोह आइना जो दिखा दे मेरी असली सूरत मुझे जब कभी भी आईने पर डाली रौशनी और धुंधला गयी सूरत मेरी गुस्से से तोड़ दिया वोह आइना चकना चूर हो गयी सूरत मेरी तनहा महसूस कर रहा था कोस रहा था हर आईने को अचानक दिल की गहराई से जानी पेहचानी सी आवाज़ आई 'बेवक़ूफ़, गर देखनी है तुझे  असली सूरत तेरी डाल रौशनी अपने आप पर तू क्यूँ बेवजह कोस रहा है आईने को? हर किसीका भी तो आइना है तू! गर देखनी है तुझे  असली सूरत तेरी ठीक कर पहले सीरत को तेरी दिखा साफ़ सूरत सबकी सबको तब देख पायेगा तू  असली सूरत तेरी' - Musten Jiruwala

कल

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जब कल नहीं था , पछतावा भी नहीं था जब कल नहीं था , कोई उम्मीद भी नहीं थी जब कल नहीं था , कोई मायूसी भी नहीं थी जब कल नहीं था , कोई ख्वाइश भी नहीं थी जब कल नहीं था , कोई तड़प भी नहीं थी जब कल नहीं था , कोई फखर भी नहीं था जब कल नहीं था , कोई गुस्सा भी नहीं था जब कल नहीं था , कोई अफ़सोस भी नहीं था जब कल नहीं था , बहुत मोहब्बत थी जब कल नहीं था , बहुत ख़ुशी थी जब कल नहीं था , बहुत सुकून था अफ़सोस की आज " कल " है इस लिए मोहब्बत की शदीद ख्वाइश है ख़ुशी के लिए दिल तड़प रहा है सुकून की तो सिर्फ उम्मीद ही है आज " कल " में जैसे की खो गया है - मुस्तन जिरुवाला

Akela, Tanha

Mehez ek...

Titli - Khushi ka ek lamha

Reflections

Aage, peechhey, daaye, baaye, upar neechey, harr taraf dushman zamana tha Gaur sse dekha tto mei akela aur harr taraf sirf aaina hhi aaina tha - Musten (27th May, 2008) (In front or back, on left or right, up or down, I found only foes when I looked closer, I was all alone with mirrors all over)