Labels

Thursday, July 21, 2011

कल



जब कल नहीं था, पछतावा भी नहीं था
जब कल नहीं था, कोई उम्मीद भी नहीं थी
जब कल नहीं था, कोई मायूसी भी नहीं थी
जब कल नहीं था, कोई ख्वाइश भी नहीं थी
जब कल नहीं था, कोई तड़प भी नहीं थी
जब कल नहीं था, कोई फखर भी नहीं था
जब कल नहीं था, कोई गुस्सा भी नहीं था
जब कल नहीं था, कोई अफ़सोस भी नहीं था

जब कल नहीं था, बहुत मोहब्बत थी
जब कल नहीं था, बहुत ख़ुशी थी
जब कल नहीं था, बहुत सुकून था

अफ़सोस की आज "कल" है
इस लिए
मोहब्बत की शदीद ख्वाइश है
ख़ुशी के लिए दिल तड़प रहा है
सुकून की तो सिर्फ उम्मीद ही है

आज "कल" में जैसे की खो गया है
- मुस्तन जिरुवाला

Wednesday, July 06, 2011

Yearning




In the beginning
of the universe,
I was one.

There was no one
to call me
names

There was no one
to classify me
as male or female

There was no one
to label me
as Hindu or Muslim

Nobody was there
to make me
rich or poor

Nobody.
None.
Just me.

I yearned for
someone
to talk to me

I yearned for
someone
to acknowledge me

I yearned for
someone
to notice me

So, I decided
to divide me.
Again and again.

More and more
I divided me,
yearning multiplied

Now,
I am no one.
I am Yearning.

- Musten Jiruwala